शुक्रवार, 20 दिसंबर 2024

ये देख तमाशा जग का,Ye tamasha jag ka ||तर्ज – दिल दीवाने का

मेरा दिल करता है श्याम को, मैं घर पे ले आऊं भजन का भावार्थ बहुत ही सुंदर और गहरा है!

इस भजन में भगवान श्याम (कृष्ण) के प्रति प्रेम और आकर्षण की भावना को व्यक्त किया गया है। यह भजन भगवान श्याम की महिमा और उनके प्रेम को व्यक्त करता है।

इस भजन के मुख्य भावार्थ हैं:

1. प्रेम और आकर्षण: इस भजन में भगवान श्याम के प्रति प्रेम और आकर्षण की भावना को व्यक्त किया गया है।
2. आध्यात्मिक प्रेम: यह भजन आध्यात्मिक प्रेम की भावना को व्यक्त करता है, जो कि भगवान श्याम के प्रति समर्पण और भक्ति को दर्शाता है।
3. भगवान की महिमा: इस भजन में भगवान श्याम की महिमा और उनके प्रेम को व्यक्त किया गया है।
4. आत्म-समर्पण: यह भजन आत्म-समर्पण की भावना को व्यक्त करता है, जो कि भगवान श्याम के चरणों में समर्पण को दर्शाता है।

इस प्रकार, मेरा दिल करता है श्याम को, मैं घर पे ले आऊं भजन का भावार्थ बहुत ही सुंदर और गहरा है, जो कि भगवान श्याम के प्रति प्रेम और आकर्षण की भावना को व्यक्त करता है




ये देख तमाशा जग का,
भीतर से दुख पाऊं,
मेरा दिल करता है श्याम को,
मैं घर पे ले आऊं,
मेरा दिल करता है श्याम को,
मैं घर पे ले आऊं ॥

तुझे अपने पास बिठाके,
रख लूं मैं तुम्हे छिपा के,
मतलब से भरी निगाहें,
ना देखे नजर उठाके,
बस तू हो मैं हूं बाबा,
मैं भजन तेरे गाऊं,
मेरा दिल करता है श्याम को,
मैं घर पे ले आऊं ॥


जो चमत्कार को तेरे,
ये नमस्कार करते है,
व्यापार करे वो बाबा,
नहीं तुमसे प्यार करते है,
में सेवा करूंगा तेरी,
तुमसे ना कुछ चाहूँ,
मेरा दिल करता है श्याम को,
मैं घर पे ले आऊं ॥


तू देना छोड़ दे बाबा,
ना भेज तू खर्चा घर का,
आते है लोट कर कितने,
फिर देख नजारा दर का,
हो जाओ ‘सचिन’ के बाबा,
कुछ ऐसा कर जाऊं,
मेरा दिल करता है श्याम को,
मैं घर पे ले आऊं ॥


ये देख तमाशा जग का,
भीतर से दुख पाऊं,
मेरा दिल करता है श्याम को,
मैं घर पे ले आऊं,
मेरा दिल करता है श्याम को,
मैं घर पे ले आऊं ॥

गुरुवार, 19 दिसंबर 2024

तुम शरणाई आया ठाकुर|| Tum sharan aayaa thakur

"तुम शरणाई आया ठाकुर" भजन का भावार्थ बहुत ही सुंदर और गहरा है!


इस भजन में भगवान को शरणाई (आश्रय) के रूप में पूजा जाता है, जो कि व्यक्ति के जीवन में सभी चुनौतियों और कठिनाइयों से बचाने में मदद करता है। यह भजन भगवान की महिमा और उनके आश्रय को व्यक्त करता है।


इस भजन के मुख्य भावार्थ हैं:


1. भगवान का आश्रय: इस भजन में भगवान को आश्रय के रूप में पूजा जाता है, जो कि व्यक्ति के जीवन में सभी चुनौतियों और कठिनाइयों से बचाने में मदद करता है।
2. सुरक्षा और रक्षा: यह भजन भगवान की सुरक्षा और रक्षा को व्यक्त करता है, जो कि व्यक्ति के जीवन में सभी खतरों और चुनौतियों से बचाने में मदद करता है।
3. आत्म-समर्पण: इस भजन में आत्म-समर्पण की भावना को व्यक्त किया गया है, जो कि भगवान के चरणों में समर्पण को दर्शाता है।
4. भगवान की महिमा: यह भजन भगवान की महिमा और उनके आश्रय को व्यक्त करता है, जो कि व्यक्ति के जीवन में सभी चुनौतियों और कठिनाइयों से बचाने में मदद करता है।


इस प्रकार, "तुम शरणाई आया ठाकुर" भजन का भावार्थ बहुत ही सुंदर और गहरा है, जो कि भगवान के आश्रय और सुरक्षा को व्यक्त करता है





तुम शरणाई आया ठाकुर,तुम शरणाई आया,
उतर गयो मेरे मन का शंसा,
जब ते दर्शन पाया,
तुम शरणाई आया ठाकुर,
तुम शरणाई आया।।

अनबोलत मेरी बिरथा जानी,
अनबोलत मेरी बिरथा जानी,
अपना नाम जपाया, ठाकुर,
तुम शरणाई आया,
तुम शरणाई आया ठाकुर,
तुम शरणाई आया।।

दुःख नाटे सुख सहज समाए,
आनंद आनंद गुण गाया, ठाकुर,
तुम शरणाई आया,
तुम शरणाई आया ठाकुर,
तुम शरणाई आया।।

बाँह पकड़ कढ़ लीन्हे अपने,
गृह अंध कूप ते माया, ठाकुर,
तुम शरणाई आया,
तुम शरणाई आया ठाकुर,
तुम शरणाई आया।।

कहो नानक गुरु बंधन काटे,
कहो नानक गुरु बंधन काटे,
बिछुरत आन मिलाया, ठाकुर,
तुम शरणाई आया,
तुम शरणाई आया ठाकुर,
तुम शरणाई आया।
उतर गयो मेरे मन का शंसा,
जब ते दर्शन पाया,
तुम शरणाई आया ठाकुर,
तुम शरणाई आया........

बुधवार, 18 दिसंबर 2024

किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम हो जाए। Kishori kuchh aisa intjaam ho jaye

यह भजन श्री राधा रानी की महिमा और उनके प्रति प्रेम को व्यक्त करता है। इसमें श्री राधा रानी को वृन्दावन की महारानी और मुक्ति की दाता कहा गया है।

भजन में आगे कहा गया है कि श्री राधा रानी के चरणों में ही जीवन की सार्थकता है, और उनके प्रेम में ही जीवन की सच्ची खुशी है। इसमें श्री राधा रानी से प्रार्थना की गई है कि वे अपने भक्तों पर कृपा करें और उन्हें अपने चरणों में स्थान दें।

इस भजन के मुख्य भावार्थ हैं:

1. श्री राधा रानी की महिमा: इसमें श्री राधा रानी की महिमा और उनके प्रति प्रेम को व्यक्त किया गया है।
2. प्रेम और समर्पण: इसमें श्री राधा रानी के प्रति प्रेम और समर्पण को दर्शाया गया है।
3. जीवन की सार्थकता: इसमें कहा गया है कि श्री राधा रानी के चरणों में ही जीवन की सार्थकता है।
4. सच्ची खुशी: इसमें कहा गया है कि श्री राधा रानी के प्रेम में ही जीवन की सच्ची खुशी है।

इस प्रकार, यह भजन श्री राधा रानी की महिमा और उनके प्रति प्रेम को व्यक्त करता है, और उनके चरणों में समर्पण की भावना को दर्शाता है





किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम हो जाए।

जुबा पे राधा राधा राधा नाम हो जाए॥

जब गिरते हुए मैंने तेरे नाम लिया है।
तो गिरने ना दिया तूने, मुझे थाम लिया है॥

तुम अपने भक्तो पे कृपा करती हो, श्री राधे।
उनको अपने चरणों में जगह देती हो श्री राधे।
तुम्हारे चरणों में मेरा मुकाम हो जाए॥

मांगने वाले खाली ना लौटे, कितनी मिली खैरात ना पूछो।
उनकी कृपा तो उनकी कृपा है, उनकी कृपा की बात ना पूछो॥

ब्रज की रज में लोट कर, यमुना जल कर पान।
श्री राधा राधा रटते, या तन सों निकले प्राण॥

गर तुम ना करोगी तो कृपा कौन करेगा।
गर तुम ना सुनोगी तो मेरी कौन सुनेगा॥

डोलत फिरत मुख बोलत मैं राधे राधे, और जग जालन के ख्यालन से हट रे।
जागत, सोवत, पग जोवत में राधे राधे, रट राधे राधे त्याग उरते कपट रे॥

लाल बलबीर धर धीर रट राधे राधे, हरे कोटि बाधे रट राधे झटपट रे।
ऐ रे मन मेरे तू छोड़ के झमेले सब, रट राधे रट राधे राधे रट रे॥

श्री राधे इतनी कृपा तुम्हारी हम पे हो जाए।
किसी का नाम लूँ जुबा पे तुम्हारा नाम आये॥

वो दिन भी आये तेरे वृन्दावन आयें हम, तुम्हारे चरणों में अपने सर को झुकाएं हम।
ब्रज गलिओं में झूमे नाचे गायें हम, मेरी सारी उम्र वृन्दावन में तमाम हो जाए॥

वृन्दावन के वृक्ष को, मर्म ना जाने कोई।
डार डार और पात पात में, श्री श्री राधे राधे होए॥

अरमान मेरे दिल का मिटा क्यूँ नहीं देती, सरकार वृन्दावन में बुला क्यूँ नहीं लेती।
दीदार भी होता रहे हर वक्त बार बार, चरणों में अपने हमको बिठा क्यूँ नहीं लेती॥

श्री वृन्दावन वास मिले, अब यही हमारी आशा है।
यमुना तट छाव कुंजन की जहाँ रसिकों का वासा है॥

सेवा कुञ्ज मनोहर निधि वन, जहाँ इक रस बारो मासा है।
ललिता किशोर अब यह दिल बस, उस युगल रूप का प्यासा है॥

मैं तो आई वृन्दावन धाम किशोरी तेरे चरनन में।
किशोरी तेरे चरनन में, श्री राधे तेरे चरनन में॥

ब्रिज वृन्दावन की महारानी, मुक्ति भी यहाँ भारती पानी।
तेरे चन पड़े चारो धाम, किशोरी तेरे चरनन में॥

करो कृपा की कोर श्री राधे, दीन जजन की ओर श्री राधे।
मेरी विनती है आठो याम, किशोरी तेरे चरनन में॥

बांके ठाकुर की ठकुरानी, वृन्दावन जिन की रजधानी।
तेरे चरण दबवात श्याम, किशोरी तेरे चरनन में॥

मुझे बनो लो अपनी दासी, चाहत नित ही महल खवासी।
मुझे और ना जग से काम, किशोरी तेरे चरण में ॥

किशोरी इस से बड कर आरजू -ए-दिल नहीं कोई।
तुम्हारा नाम है बस दूसरा साहिल नहीं कोई।
तुम्हारी याद में मेरी सुबहो श्याम हो जाए॥

यह तो बता दो बरसाने वाली मैं कैसे तुम्हारी लगन छोड़ दूंगा।
तेरी दया पर यह जीवन है मेरा, मैं कैसे तुम्हारी शरण छोड़ दूंगा॥

ना पूछो किये मैंने अपराध क्या क्या, कही यह जमीन आसमा हिल ना जाये।
जब तक श्री राधा रानी शमा ना करोगी, मैं कैसे तुम्हारे चरण छोड़ दूंगा॥

बहुत ठोकरे खा चूका ज़िन्दगी में, तमन्ना तुम्हारे दीदार की है।
जब तक श्री राधा रानी दर्शा ना दोगी, मैं कैसे तुम्हारा भजन छोड़ दूंगा॥

तारो ना तारो मर्जी तुम्हारी, लेकिन मेरी आखरी बात सुन लो।
मुझ को श्री राधा रानी जो दर से हटाया, तुम्हारे ही दर पे मैं दम तोड़ दूंगा॥

मरना हो तो मैं मरू, श्री राधे के द्वार,
कभी तो लाडली पूछेगी, यह कौन पदीओ दरबार॥

आते बोलो, राधे राधे, जाते बोलो, राधे राधे।
उठते बोलो, राधे राधे, सोते बोलो, राधे राधे।
हस्ते बोलो, राधे राधे, रोते बोलो, राधे राधे॥

जानकी नाथ सहाय करें || Janki Nath sahay kare





जानकी नाथ सहाय करें जानकी नाथ सहाय करें,
जब कौन बिगाड़ करे नर तेरो
सुरज मंगल सोम भृगु सुत बुध और गुरु वरदायक तेरो
राहु केतु की नाहिं गम्यता,
संग शनीचर होत हुचेरो
जानकी नाथ सहाय करें..

दुष्ट दु:शासन विमल द्रौपदी,
चीर उतार कुमंतर प्रेरो
ताकी सहाय करी करुणानिधि,
बढ़ गये चीर के भार घनेरो
जानकी नाथ सहाय करें..
जाकी सहाय करी करुणानिधि,
ताके जगत में भाग बढ़े रो
रघुवंशी संतन सुखदाय,
तुलसीदास चरनन को चेरो

जब जानकी नाथ सहाय करें,
जब जानकी नाथ सहाय करे,
तब कौन बिगाड़ करे नर तेरो

भावार्थ -

यह एक भक्ति गीत है जो भगवान राम की पत्नी सीता के रूप में जानकी नाथ की सहायता और रक्षा की भावना को व्यक्त करता है। इसमें कहा गया है कि जब जानकी नाथ सहायता करते हैं, तो कोई भी व्यक्ति किसी भी प्रकार की समस्या या विपत्ति से नहीं घबराता है।

गीत में आगे कहा गया है कि भगवान राम की सहायता से सीता की लाज बचाई गई थी, जब दुशासन ने उनका चीर उतारने की कोशिश की थी। इसमें कहा गया है कि भगवान राम की सहायता से सीता की लाज बचाई गई थी और उनके चीर का भार बढ़ गया था।

गीत में आगे कहा गया है कि जिनकी सहायता भगवान राम करते हैं, उनके जीवन में सुख और समृद्धि आती है। इसमें कहा गया है कि भगवान राम की सहायता से व्यक्ति के जीवन में सुख और समृद्धि आती है और उनके चरित्र में सुधार होता है।

इस गीत के मुख्य भावार्थ हैं:

1. भगवान राम की सहायता: इसमें भगवान राम की सहायता और रक्षा की भावना को व्यक्त किया गया है।
2. सीता की लाज बचाई गई: इसमें सीता की लाज बचाई गई थी, जब दुशासन ने उनका चीर उतारने की कोशिश की थी।
3. सुख और समृद्धि: इसमें कहा गया है कि जिनकी सहायता भगवान राम करते हैं, उनके जीवन में सुख और समृद्धि आती है।
4. चरित्र में सुधार: इसमें कहा गया है कि भगवान राम की सहायता से व्यक्ति के चरित्र में सुधार होता है।

इस प्रकार, यह गीत भगवान राम की सहायता और रक्षा की भावना को व्यक्त करता है, और सीता की लाज बचाई गई थी, जब दुशासन ने उनका चीर उतारने की कोशिश की थी

Ambe Tu Hai Jagdambe Kali || अम्बे तू है जगदम्बे काली


 अम्बे तू है जगदम्बे काली,



जय दुर्गे खप्पर वाली ।
तेरे ही गुण गाये भारती,
ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥

तेरे भक्त जनो पर,
भीर पडी है भारी माँ ।
दानव दल पर टूट पडो,
माँ करके सिंह सवारी ।
सौ-सौ सिंहो से बलशाली,
अष्ट भुजाओ वाली,
दुष्टो को पलमे संहारती ।
ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥

अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली ।
तेरे ही गुण गाये भारती,
ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती 

माँ बेटे का है इस जग मे,
बडा ही निर्मल नाता ।
पूत – कपूत सुने है पर न,
माता सुनी कुमाता ॥
सब पे करूणा दरसाने वाली,
अमृत बरसाने वाली,
दुखियो के दुखडे निवारती ।
ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥

अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली ।
तेरे ही गुण गाये भारती,
ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥

भावार्थ- 

यह एक देवी आरती है जो देवी दुर्गा की महिमा और शक्ति का वर्णन करती है। इसमें देवी दुर्गा को जगदम्बे काली और खप्पर वाली कहा गया है, जो कि उनकी शक्ति और साहस को दर्शाता है।

आरती में आगे कहा गया है कि देवी दुर्गा अपने भक्तों पर बहुत प्यार और दया करती हैं, और उनकी रक्षा करती हैं। वह दानवों और दुष्टों को नष्ट करती हैं और अपने भक्तों को सुख और समृद्धि प्रदान करती हैं।

आरती में आगे कहा गया है कि देवी दुर्गा एक माता की तरह अपने बच्चों की देखभाल करती हैं, और उनके दुखों को दूर करती हैं। वह अपने भक्तों को अमृत और सुख प्रदान करती हैं।

इस आरती के मुख्य भावार्थ हैं:

1. देवी दुर्गा की महिमा: इसमें देवी दुर्गा की महिमा और शक्ति का वर्णन किया गया है।
2. भक्तों की रक्षा: इसमें कहा गया है कि देवी दुर्गा अपने भक्तों की रक्षा करती हैं।
3. दानवों का नाश: इसमें कहा गया है कि देवी दुर्गा दानवों और दुष्टों को नष्ट करती हैं।
4. माता की देखभाल: इसमें कहा गया है कि देवी दुर्गा एक माता की तरह अपने बच्चों की देखभाल करती हैं।

इस प्रकार, यह आरती देवी दुर्गा की महिमा और शक्ति का वर्णन करती है, और उनकी भक्ति और पूजा को बढ़ावा देती है

मंगलवार, 17 दिसंबर 2024

मुझे अपनी शरण में || jeewan de ke jaal bichhaya



मुझे अपनी शरण में ले लो राम, ले लो राम!
लोचन मन में जगह न हो तो
जुगल चरण में ले लो राम, ले लो राम!
जीवन देके जाल बिछाया
रच के माया नाच नचया
चिन्ता मेरी तभी मिटेगी
जब चिन्तन में ले लो राम, ले लो राम!
मुझे अपनी शरण में ले लो राम!

तू ने लाखोँ पापी तारे
मेरी बारी बाजी हारे, बाजी हारे
मेरे पास न पुण्य की पूँजी
पद पूजन में ले लो राम, ले लो राम!
मुझे अपनी शरण में ले लो राम!
राम हे राम, राम हे राम
दर दर भटकूँ घर घर अटकूँ
कहाँ कहाँ अपना सर पटकूँ
इस जीवन में मिलो न तुम तो राम, हे राम!
इस जीवन में मिलो न तुम तो,
मुझे मरण में ले लो राम, ले लो राम!

मुझे अपनी शरण में ले लो राम, ले लो राम!
लोचन मन में जगह न हो तो
जुगल चरण में ले लो राम, ले लो राम!




भावार्थ-

यह एक भक्ति गीत है जो भगवान राम की शरण में जाने और उनकी कृपा प्राप्त करने की भावना को व्यक्त करता है। इसमें कवि भगवान राम से कहता है कि वह उसे अपनी शरण में ले ले, क्योंकि वह अपने जीवन में बहुत परेशानियों का सामना कर रहा है।

गीत में आगे कहा गया है कि कवि के पास पुण्य की पूँजी नहीं है, और वह भगवान राम की शरण में जाने के लिए तैयार है। वह भगवान राम से कहता है कि वह उसे अपने चरणों में ले ले, और उसकी चिंता को दूर करे।

गीत में आगे कहा गया है कि कवि भगवान राम की शरण में जाने के लिए तैयार है, और वह अपने जीवन में भगवान राम को पाने के लिए उत्सुक है। वह भगवान राम से कहता है कि वह उसे अपनी शरण में ले ले, और उसकी आत्मा को शांति प्रदान करे।

इस गीत के मुख्य भावार्थ हैं:

1. भगवान राम की शरण में जाना: इसमें भगवान राम की शरण में जाने और उनकी कृपा प्राप्त करने की भावना को व्यक्त किया गया है।
2. चिंता और परेशानी: इसमें कवि की चिंता और परेशानी को व्यक्त किया गया है, और भगवान राम से उनकी चिंता को दूर करने की प्रार्थना की गई है।
3. भगवान राम की कृपा: इसमें भगवान राम की कृपा और उनकी शरण में जाने के लाभों को व्यक्त किया गया है।
4. आत्म-समर्पण: इसमें कवि का आत्म-समर्पण और भगवान राम की शरण में जाने की भावना को व्यक्त किया गया है।

इस प्रकार, यह गीत भगवान राम की शरण में जाने और उनकी कृपा प्राप्त करने की भावना को व्यक्त करता है, और कवि की चिंता और परेशानी को दूर करने की प्रार्थना करता है

भजमन राम चरण सुखदाई || Bhajman Ram charan sukhdayi

"भजमन राम चरण सुखदाई" भजन एक सुंदर और भक्तिपूर्ण गीत है, जो भगवान राम की महिमा और उनके चरणों की सुखदाई शक्ति को व्यक्त करता है।

इस भजन में भगवान राम के चरणों को सुखदाई और मोक्षदाई कहा गया है, जो कि व्यक्ति के जीवन में सभी चुनौतियों और कठिनाइयों से बचाने में मदद करते हैं। यह भजन भगवान राम की महिमा और उनके चरणों की शक्ति को व्यक्त करता है, और उनके चरणों में समर्पण की भावना को दर्शाता है।

इस भजन के मुख्य भावार्थ हैं:

1. भगवान राम की महिमा: इसमें भगवान राम की महिमा और उनके चरणों की सुखदाई शक्ति को व्यक्त किया गया है।
2. समर्पण और भक्ति: इसमें भगवान राम के चरणों में समर्पण और भक्ति की भावना को व्यक्त किया गया है।
3. जीवन की सार्थकता: इसमें कहा गया है कि भगवान राम के चरणों में समर्पण से जीवन की सार्थकता प्राप्त होती है।
4. आध्यात्मिक शांति: इसमें कहा गया है कि भगवान राम के चरणों में समर्पण से आध्यात्मिक शांति और आनंद प्राप्त होता है।

इस प्रकार, "भजमन राम चरण सुखदाई" भजन एक सुंदर और भक्तिपूर्ण गीत है, जो भगवान राम की महिमा और उनके चरणों की सुखदाई शक्ति को व्यक्त करता है



भजमन राम चरण सुखदाई,

भजमन राम चरण सुखदाई ॥
जिहि चरननसे निकसी सुरसरि
संकर जटा समाई ।
जटासंकरी नाम परयो है
त्रिभुवन तारन आई ॥

भजमन राम चरण सुखदाई,
भजमन राम चरण सुखदाई ॥

जिन चरननकी चरनपादुका
भरत रह्यो लव लाई ।
सोइ चरन केवट धोइ लीने
तब हरि नाव चलाई/चढ़ाई ॥

भजमन राम चरण सुखदाई,
भजमन राम चरण सुखदाई ॥

सोइ चरन संत जन सेवत
सदा रहत सुखदाई ।
सोइ चरन गौतमऋषि-नारी
परसि परमपद पाई ॥

भजमन राम चरण सुखदाई,
भजमन राम चरण सुखदाई ॥

दंडकबन प्रभु पावन कीन्हो
ऋषियन त्रास मिटाई ।
सोई प्रभु त्रिलोकके स्वामी
कनक मृगा सँग धाई ॥

भजमन राम चरण सुखदाई,
भजमन राम चरण सुखदाई ॥

कपि सुग्रीव बंधु भय-ब्याकुल
तिन जय छत्र फिराई/धराई ।
रिपु को अनुज बिभीषन निसिचर
परसत लंका पाई ॥

भजमन राम चरण सुखदाई,
भजमन राम चरण सुखदाई ॥

सिव सनकादिक अरु ब्रह्मादिक
सेष सहस मुख गाई ।

तुलसीदास मारुत-सुतकी प्रभु
निज मुख करत बड़ाई ॥

भजमन राम चरण सुखदाई,
भजमन राम चरण सुखदाई ॥

पायो जी मैंने राम रतन धन पायो || payoji maine raam ratan dhan payo





आ आ आ आ आ
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो
पायो जी मैंने
वस्तु अमोलिक दी मेरे सतगुरु
वस्तु अमोलिक दी मेरे सतगुरु
कृपा कर अपनायो
पायो जी मैंने कृपा कर अपनायो
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो
आ आ आ आ आ
रे रे म ग ग ग रे नि रे ग म प ध प ग
ग म प नि सा ग म ग ग रे म ग रे सा
जन्म जन्म की पूंजी पाई
जन्म जन्म की पूंजी पाई
जग में सबी खुमायो
पायो जी मैंने जग में सबी खुमायो
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो
आ आ आ आ आ
खर्च ना खूटे चोर ना लूटे
खर्च ना खूटे चोर ना लूटे
दिन दिन बढ़त सवायो
पायो जी मैंने दिन दिन बढ़त सवायो
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो
धिमता धेरेना धिमता धेरेना धेरेरेरेरेना धेरेरेना धेरे
सत की नाव खेवटिया सतगुरु
सत की नाव खेवटिया सतगुरु
भवसागर तऱयायो
पायो जी मैंने भवसागर तऱयायो
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो
आ आ आ आ आ
मीरा के प्रभु गिरिधर नागर
मीरा के प्रभु गिरिधर नागर
हर्क हर्क जस गायो
पायो जी मैंने हर्क हर्क जस गायो
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो

भावार्थ-

यह एक भक्ति गीत है जो भगवान राम की महिमा और उनके नाम की शक्ति का वर्णन करता है। इसमें कहा गया है कि भगवान राम का नाम एक अमोलिक वस्तु है जो सतगुरु की कृपा से प्राप्त होती है।

गीत में आगे कहा गया है कि भगवान राम का नाम जन्म जन्म की पूंजी है, जो जगत में सबी खुमायो प्रदान करती है। इसमें कहा गया है कि भगवान राम का नाम खर्च नहीं होता, चोर नहीं लूटते, और दिन दिन बढ़ता है।

गीत में आगे कहा गया है कि सतगुरु ने सत की नाव खेवटी है, जो भवसागर को तऱयाती है। इसमें कहा गया है कि मीरा के प्रभु गिरिधर नागर ने भगवान राम का नाम गाया है, जो हर्क हर्क जस से भरा है।

इस गीत के मुख्य भावार्थ हैं:

1. भगवान राम की महिमा: इसमें भगवान राम की महिमा और उनके नाम की शक्ति का वर्णन किया गया है।
2. सतगुरु की कृपा: इसमें सतगुरु की कृपा का महत्व बताया गया है।
3. भगवान राम का नाम: इसमें भगवान राम का नाम एक अमोलिक वस्तु बताया गया है।
4. भक्ति और प्रेम: इसमें भगवान राम के प्रति भक्ति और प्रेम की भावना को व्यक्त किया गया है।

इस प्रकार, यह गीत भगवान राम की महिमा और उनके नाम की शक्ति का वर्णन करता है, और सतगुरु की कृपा और भगवान राम के प्रति भक्ति और प्रेम की भावना को व्यक्त करता है

चलो मन गंगा जमुना तीर || Chalo man Ganga Jamuna teer

https://shorturl.at/aUX8i यह भजन भगवान कृष्ण की महिमा और गंगा-जमुना के तीर्थ स्थल की सुंदरता को व्यक्त करता है। इसमें गंगा-जमुना के पवित्र जल को निर्मल और शीतल बताया गया है, जो कि शरीर और आत्मा को शांति और सुकून प्रदान करता है।
भजन में आगे कहा गया है कि भगवान कृष्ण गंगा-जमुना के तीर पर विराजमान हैं, और उनकी बंसी की धुन पर नाचते हैं। इसमें भगवान कृष्ण के सुंदर रूप का वर्णन किया गया है, जिसमें उनके मोर मुकुट, पीताम्बर, और कुण्डलों का उल्लेख किया गया है।


इस भजन के मुख्य भावार्थ हैं:

1. गंगा-जमुना की महिमा: इसमें गंगा-जमुना के पवित्र जल को निर्मल और शीतल बताया गया है।
2. भगवान कृष्ण की महिमा: इसमें भगवान कृष्ण के सुंदर रूप का वर्णन किया गया है।
3. भक्ति और समर्पण: इसमें भगवान कृष्ण के चरणों में समर्पण और भक्ति की भावना को व्यक्त किया गया है।
4. आध्यात्मिक शांति: इसमें कहा गया है कि गंगा-जमुना के तीर पर भगवान कृष्ण के दर्शन से आध्यात्मिक शांति और सुकून प्राप्त होता है।
इस प्रकार, यह भजन भगवान कृष्ण की महिमा और गंगा-जमुना के तीर्थ स्थल की सुंदरता को व्यक्त करता है, और भगवान कृष्ण के चरणों में समर्पण और भक्ति की भावना को दर्शाता है






चलो मन गंगा जमुना तीर,चलो मन गंगा जमुना तीर,

चलो मन गंगा जमुना तीर,
गंगा जमुना निर्मल पानी,
गंगा जमुना निर्मल पानी,
गंगा जमुना निर्मल पानी,
शीतल होत शरीर,
चलो मन गंगा जमुना तीर,
बंसी बजावत नाचत कान्हा,
संग लिये बलबीर,
चलो मन गंगा जमुना तीर,

मोर मुकुट पीताम्बर सोहे,
कुण्डल झलकत हीर,
चलो मन गंगा जमुना तीर,

मीरा के प्रभु गिरिधर नागर,
चरण कमल पर शीश,
चलो मन गंगा जमुना तीर,

चलो मन गंगा-जमुना तीर,
गंगा जमना निरमल पाणी
शीतल होत शरीर,

चलो मन गंगा जमुना तीर,
चलो मन गंगा जमुना तीर,
चलो मन गंगा जमुना तीर,
गंगा जमुना निर्मल पानी,
गंगा जमुना निर्मल पानी,
गंगा जमुना निर्मल पानी,
शीतल होत शरीर,
चलो मन गंगा जमुना तीर,
चलो मन गंगा जमुना तीर,
चलो मन गंगा जमुना तीर,
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सोमवार, 16 दिसंबर 2024

कितना प्यारा है सिंगार | Kitana pyara hai singar





कितना प्यारा है सिंगार,
की तेरी लेउ नज़र उतार,
कितना प्यारा है,
ओ हो, कितना प्यारा है सिंगार,
की तेरी लेउ नज़र उतार,
कितना प्यारा है।।

सांवरिया तुमको किसने सजाया है,
तुझे सुन्दर से सुन्दर कजरा पहनाया है,
कितना प्यारा हैं सिंगार,
की तेरी लेउ नज़र उतार,
कितना प्यारा है।।

केशर चन्दन तिलक लगाकर,
सज धज कर के बैठ्यो है,
लग गए तेरे चार चाँद जो,
पहले तो निहार
कितना प्यारा है,
ओ हो, कितना प्यारा हैं सिंगार,
की तेरी लेउ नज़र उतार,
कितना प्यारा है,
सांवरिया तेरा चेहरा चमकता है
तेरा कीर्तन बहुत बड़ा,
दरबार महकता है, कितना प्यारा है,
ओ हो, कितना प्यारा हैं सिंगार,
की तेरी लेउ नज़र उतार,
कितना प्यारा है।।

किसी भगत से कह कर कान्हा,
काली टिकी लगवाले
या फिर तू बोले तो लेउ,
नूनराइ वार, कितना प्यारा है,
ओ हो, कितना प्यारा हैं सिंगार,
की तेरी लेउ नज़र उतार,
कितना प्यारा हैं,
सांवरिया तेरे भगतो को तेरी फ़िक्र
कही लग ना जाये तुझे,
दुनिया की बुरी नज़र, कितना प्यारा है,
ओ हो, कितना प्यारा हैं सिंगार,
की तेरी लेउ नज़र उतार,
कितना प्यारा है।।

पता नहीं तू किस रंग का है,
आज तलक ना जान सकी,
बनवारी हमने देखे है तेरे रंग हजार,
कितना प्यारा हैं,
ओ हो, कितना प्यारा है सिंगार,
की तेरी लेउ नज़र उतार,
कितना प्यारा है,
सांवरिया थोड़ा बच बच के रहना जी
कभी मान भी लो कान्हा,
भक्तो का कहना जी,
कितना प्यारा है,
ओ हो, कितना प्यारा हैं सिंगार,
की तेरी लेउ नज़र उतार,
कितना प्यारा है।।

सांवरिया तेरा रोज करू श्रृंगार
कभी कुटिया में मेरे,
आजाओ एक बार, कितना प्यारा है,
ओ हो, कितना प्यारा है सिंगार,
की तेरी लेउ नज़र उतार,
कितना प्यारा है।।
समीक्षा-
यह भजन भगवान कृष्ण की सुंदरता और उनके श्रृंगार की महिमा को व्यक्त करता है। इसमें भगवान कृष्ण को सांवरिया कहा गया है, जो कि उनके सुंदर और आकर्षक रूप को दर्शाता है।

भजन में आगे कहा गया है कि भगवान कृष्ण का श्रृंगार बहुत ही सुंदर और आकर्षक है, और उनकी लेउ नज़र उतारने से ही जीवन की सार्थकता प्राप्त होती है। इसमें भगवान कृष्ण की सुंदरता और उनके श्रृंगार की महिमा को व्यक्त किया गया है।

इस भजन के मुख्य भावार्थ हैं:

1. भगवान कृष्ण की सुंदरता: इसमें भगवान कृष्ण की सुंदरता और उनके श्रृंगार की महिमा को व्यक्त किया गया है।
2. श्रृंगार की महिमा: इसमें भगवान कृष्ण के श्रृंगार की महिमा को व्यक्त किया गया है, जो कि उनकी सुंदरता और आकर्षक रूप को दर्शाता है।
3. भक्ति और समर्पण: इसमें भगवान कृष्ण के प्रति भक्ति और समर्पण की भावना को व्यक्त किया गया है।
4. जीवन की सार्थकता: इसमें कहा गया है कि भगवान कृष्ण की लेउ नज़र उतारने से ही जीवन की सार्थकता प्राप्त होती है।

इस प्रकार, यह भजन भगवान कृष्ण की सुंदरता और उनके श्रृंगार की महिमा को व्यक्त करता है, और भगवान कृष्ण के प्रति भक्ति और समर्पण की भावना को दर्शाता है
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ऐसी लागी लगन मीरा हो गयी मगन|| Aisi laagi lagan

 



है आँख वो जो श्याम का दर्शन किया करे

है शीश जो प्रभु चरण में वंदन किया करेबेकार वो मुख है जो रहे व्यर्थ बातों मेंमुख वो है जो हरी नाम का सुमिरन किया करेहीरे मोती से नहीं शोभा है हाथ कीहै हाथ जो भगवान् का पूजन किया करेमर कर भी अमर नाम है उस जीव का जग मेंप्रभु प्रेम में बलिदान जो जीवन किया करे
ऐसी लागी लगन मीरा हो गयी मगनवो तो गली गली हरी गुण गाने लगीऐसी लागी लगन मीरा हो गयी मगनवो तो गली गली हरी गुण गाने लगीमहलों में पली बन के जोगन चलीमीरा रानी दीवानी कहाने लगीऐसी लागी लगन मीरा हो गयी मगन
कोई रोके नहीं कोई टोके नहींमीरा गोविन्द गोपाल गाने लगीकोई रोके नहीं कोई टोके नहींमीरा गोविन्द गोपाल गाने लगीबैठी संतो के संग रंगी मोहन के रंगमीरा प्रेमी प्रीतम को मनाने लगीवो तो गली गली हरी गुण गाने लगीऐसी लागी लगन मीरा हो गयी मगनवो तो गली गली हरी गुण गाने लगीमहलों में पली बन के जोगन चलीमीरा रानी दीवानी कहाने लगीऐसी लागी लगन मीरा हो गयी मगन
राणा ने विष दिया मानो अमृत पियामीरा सागर में सरिता समाने लगीराणा ने विष दिया मानो अमृत पियामीरा सागर में सरिता समाने लगीदुःख लाखों सहे मुख से गोविन्द कहेमीरा गोविन्द गोपाल गाने लगीवो तो गली गली हरी गुण गाने लगीऐसी लागी लगन मीरा हो गयी मगनवो तो गली गली हरी गुण गाने लगीमहलों में पली बन के जोगन चलीमीरा रानी दीवानी कहाने लगीऐसी लागी लगन मीरा हो गयी मगनऐसी लागी लगन मीरा हो गयी मगनऐसी लागी लगन मीरा हो गयी मगन
समीक्षा 
यह भजन मीरा बाई की भक्ति और प्रेम की कहानी को व्यक्त करता है, जो कि भगवान कृष्ण के प्रति उनकी गहरी भक्ति और समर्पण को दर्शाता है।
इस भजन में मीरा बाई की जीवन कहानी को संक्षेप में बताया गया है, जिसमें उनके महलों में पलने, जोगन बनकर चलने, और भगवान कृष्ण के प्रति उनकी गहरी भक्ति और समर्पण को दर्शाया गया है।
भजन में आगे कहा गया है कि मीरा बाई ने अपने जीवन में कई दुखों का सामना किया, लेकिन उन्होंने कभी भी भगवान कृष्ण का नाम नहीं छोड़ा। उन्होंने अपने जीवन को भगवान कृष्ण के चरणों में समर्पित कर दिया और उनकी भक्ति में मगन हो गईं।

इस भजन के मुख्य भावार्थ हैं:

1. मीरा बाई की भक्ति: इसमें मीरा बाई की भगवान कृष्ण के प्रति गहरी भक्ति और समर्पण को दर्शाया गया है।
2. प्रेम और समर्पण: इसमें मीरा बाई के जीवन में प्रेम और समर्पण की भावना को व्यक्त किया गया है।
3. दुखों का सामना: इसमें मीरा बाई के जीवन में दुखों का सामना करने की कहानी को बताया गया है।
4. भगवान कृष्ण की महिमा: इसमें भगवान कृष्ण की महिमा और उनके चरणों में समर्पण की भावना को व्यक्त किया गया है।

इस प्रकार, यह भजन मीरा बाई की भक्ति और प्रेम की कहानी को व्यक्त करता है, जो कि भगवान कृष्ण के प्रति उनकी गहरी भक्ति और समर्पण को दर्शाता है

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ओ मेरा श्याम आजा रे मेरे सामने॥

श्याम सवेरे देखूँ तुझको, मन में उठे उजियारा, तेरी छवि से जीवन मेरा, बन जाए सुखसारा। हर पल तुझको पुकारूँ मैं, तस्वीर को निहारूँ मैं, ओ मेर...