ये देख तमाशा जग का
भावार्थ पर नया भजन - तर्ज : दिल दीवाने का**
### छंद 1 - स्थायी
ये देख तमाशा जग का, सब झूठा मेला रे,
दो दिन का ये सपना है, फिर होता अकेला रे |
माया की नगरी सारी, बस एक खिलौना है,
हँसता है जग ऊपर से, भीतर सब रोना है ||
### छंद 2
बचपन खेल में खोया, जवानी में जोश आया,
बुढ़ापा आते-आते तो, सब कुछ ही झूठ पाया |
कागज़ की ये नैया है, पानी में बहती है,
साँसों की डोरी टूटी, तो फिर नहीं रहती है ||
### छंद 3
महल-दुमहले देखे, और देखे खजाने रे,
रावण जैसे राजा भी, मिट्टी में समाने रे |
साथ न दौलत जाये, न जाये तेरा बंगला,
खाली हाथ आया जग में, खाली जायेगा पगला ||
### छंद 4
अपने-पराये सारे, मतलब के साथी हैं,
स्वारथ निकलते ही तो, सब भूल ही जाती हैं |
एक सच्चा साथी है, वो मेरा सांवरा है,
गिरते को थामे हरदम, वो ही तो सहारा है ||
### छंद 5 - अंतिम
छोड़ दे अभिमान बंदे, हरि नाम सुमिर ले,
बीत रहा हर लम्हा, क्यों व्यर्थ में तू खोवै रे |
शरण में आ जा प्यारे, श्याम के तू प्यारे,
ये तमाशा छूटेगा, मिलेंगे मोहन द्वारे ||




