छंद 1 -
नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की,
भादो अष्टमी अँधेरी रात, चमकी किस्मत ग्वाल की।
मथुरा में कारा टूटी, माया सब टाल की,
यशोदा की गोद धन्य हुई, जय कन्हैया लाल की।
छंद 2 -
वसुदेव-देवकी के नयनन में ज्योति आई,
घन गरजे, यमुना उमड़ी, प्रभु ने राह बनाई।
शेषनाग ने फन ताना, वर्षा भी थम सी जाई,
नंदबाबा के द्वारे देखो, खुशियाँ झूम के छाई।
छंद 3 -
मोर मुकुट पीतांबर सोहे, मुख पर मृदु मुस्कान,
छोटी-छोटी गैया संग, छेड़े मधुर तान।
यशोदा ले बलैया, कहे मेरो प्राण,
तेरे दरस को तरसे, सारा बृज महान।
छंद 4 -
जिसने कंस का मान मिटाया, गीता ज्ञान सुनाया,
द्रौपदी की लाज बचाई, ग्वालों संग माखन खाया।
वो ही नटखट, वो ही योगी, जिसने प्रेम सिखाया,
उसके चरणों में झुक के, सारा जग हर्षाया।
छंद 5 -
आओ सब मिल गाएँ, कृष्ण कन्हैया प्यारे,
ताली-मृदंग-ढोलक संग, जय-जयकारे न्यारे।
भक्ति से जो ध्यावे, हो जाएँ वारे-न्यारे,
जन्माष्टमी पावन आई, भर दो झोली सारे।



