शनिवार, 17 अक्टूबर 2026

भज मन राम चरण सुखदाई




भज मन राम चरण सुखदाई

टेक -
भज मन राम चरण सुखदाई,
भज मन राम चरण सुखदाई ॥

छंद 1 -
जिन चरनन से गंगा प्रगटी,
शिव शीश जटा समाई।
जटा-शंकरी नाम तेहि धरयो,
जगत को देत तारि आई॥

भज मन राम चरण सुखदाई,
भज मन राम चरण सुखदाई॥

छंद 2 -
जिन चरनन की पादुका राखि,
भरत अवध राज चलाई।
सोइ चरनन केवट पखारि के,
भवसागर पार लगाई॥

भज मन राम चरण सुखदाई,
भज मन राम चरण सुखदाई॥

छंद 3 -
सोइ चरन संतन चित ध्यावत,
नित मन परम सुख पाई।
सोइ चरन परसत ही अहिल्या,
गौतम नारि गति पाई॥

भज मन राम चरण सुखदाई,
भज मन राम चरण सुखदाई॥

छंद 4 -
दंडक वन जिन चरनन पावन,


मुनि जन त्रास मिटाई।
सोइ प्रभु मृग के पीछे धाये,
लीला नर जसि दिखाई॥

भज मन राम चरण सुखदाई,
भज मन राम चरण सुखदाई॥

छंद 5 -
कपि सुग्रीव डरत भय भाई,
तिनहि राज फिर थापि दियाई।
लंक विभीषण शरण जो आयो,
परसतहि लंक पाई॥

शिव सनकादिक शेष सहस मुख,
नित जस गावत जाई।
तुलसी के प्रभु दीन दयाला,
मारुति सुवनहि बड़ाई॥

भज मन राम चरण सुखदाई,
भज मन राम चरण सुखदाई॥

"मुझे चरणों में बसा लो राम",नया भजन 2026




नया भजन - "मुझे चरणों में बसा लो राम"




मुझे अपनी शरण में ले लो राम, ले लो राम!
जग ने ठुकराया मैं हार गया,
अब तो अपना कह दो राम, कह दो राम!
मुझे अपनी शरण में ले लो राम, ले लो राम! || 1 ||

माया ने भरमाया नाथ मुझे,
अपना कहके बहकाया मुझे,
तन का दीपक बुझने वाला है,
अपनी लौ में ले लो राम, ले लो राम!
मुझे अपनी शरण में ले लो राम! || 2 ||

न मेरे जप-तप, न साधन भजन,
खाली हाथ हूँ, मैला है ये मन,
जैसा भी हूँ तुम्हारा ही तो हूँ,
अपने जन में ले लो राम, ले लो राम!
मुझे अपनी शरण में ले लो राम! || 3 ||

द्वार तुम्हारे आकर देखा,
लिखी भाग्य में प्रेम की रेखा,
नैनन में यदि जगह नहीं तो,
नैनन जल में ले लो राम, ले लो राम!
मुझे अपनी शरण में ले लो राम! || 4 ||

इस जीवन में दर्शन दे दो,
नहीं तो अंतिम श्वास में ले लो,
राम नाम ही मुक्ति मेरी,
मुझे उसी क्षण में ले लो राम, ले लो राम!
मुझे अपनी शरण में ले लो राम, ले लो राम! || 5 ||

"तुम शरणाई आया"नया भजन 2026




नया भजन - "तुम शरणाई आया"

तुम शरणाई आया ठाकुर, तुम शरणाई आया,
मिट गयो मेरे मन का अंधियारा,
जब से अलख जगाया,
तुम शरणाई आया ठाकुर, तुम शरणाई आया।। 1 ।।

बिन बोले सब पीर पछानी,
बिन बोले सब पीर पछानी,
निर्धन को धन धाम लुटाया, ठाकुर,
तुम शरणाई आया,
तुम शरणाई आया ठाकुर, तुम शरणाई आया।। 2 ।।

भ्रम के बंधन सहज ही टूटे,
हृदय कमल विकसाया, ठाकुर,
तुम शरणाई आया,
तुम शरणाई आया ठाकुर, तुम शरणाई आया।। 3 ।।

भवसागर की लहर डुबोवे,
तुम ही पार लगाया, ठाकुर,
तुम शरणाई आया,
तुम शरणाई आया ठाकुर, तुम शरणाई आया।। 4 ।।

कहो आलोक दास अब केहि बिसरूँ,
कहो आलोक दास अब केहि बिसरूँ,
तुमने आपनाय अपनाया, ठाकुर,
तुम शरणाई आया,
तुम शरणाई आया ठाकुर, तुम शरणाई आया।। 5 ।।


रविवार, 20 सितंबर 2026

जय अम्बे खप्पर वाली -नया भजन 2026

                         


जय अम्बे खप्पर वाली ।।

जय अम्बे खप्पर वाली, जय संकट हरने वाली,
तेरी महिमा गाये भारती,
ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥
2

भक्तों पर जब भीड़ पड़ी, तू दौड़ी आई माता,
सिंह चढ़ी ललकार करे, काँपे दानव-दल सारा ।
सहस्र भुजा बल धारिणी,
रक्तबीज संहारिणी,
क्षण में रिपु को मार गिराती,
ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥
3
तू ही काली तू ही दुर्गा, तू ही जग की त्राता,
खप्पर खड्ग त्रिशूल लिए, दुष्टों की संहारिणी माता ।
ज्वाला मुखी, ज्वाला वाली,
तेरे चरणों के मतवाली,
भवसागर से पार लगाती,
ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥
4
माँ-बेटे का जग में, सबसे पावन नाता,
पुत्र कुपुत्र भले हो जाए, माता नहीं कुमाता ।
करुणा की बरसात करने वाली,
दीनों के दुख हरने वाली,
आँचल में अमृत बरसाती,
ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥
5
तेरे द्वार जो आए, खाली न जाए मैया,
भक्ति का वर दे, ममता लुटाए मैया ।
हम हैं तेरे बालक सारे,
तेरे ही द्वारे पधारे,
एक तेरे ही गुण गाते,
ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली,
तेरे ही गुण गाये भारती,
ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥

शुक्रवार, 18 सितंबर 2026

जानकीनाथ सहाय करें, हर दुख-दर्द मिटाय करें,- नया भजन




जानकीनाथ सहाय करें, हर दुख-दर्द मिटाय करें,

भक्तों के जीवन में प्रभु, सुख-शांति बरसाय करें॥

जब जब संकट घेरत भारी, प्रभु ही रक्षा कराय करें,

जानकीनाथ सहाय करें, जानकीनाथ सहाय करें॥


सुरज मंगल सोम बुध गुरु, सब वरदान दिलाय करें,

राहु-केतु का भय मिटाकर, जीवन पथ सजाय करें॥

शनि भी हो संग में जब, प्रभु कृपा दिखलाय करें,

जानकीनाथ सहाय करें, जानकीनाथ सहाय करें॥


द्रौपदी की लाज बचाई, दुष्टों को हराय करें,

करुणानिधि प्रभु राम सदा, धर्म की रक्षा कराय करें॥

जाकी सहाय करी प्रभु ने, उसका भाग बढ़ाय करें,

जानकीनाथ सहाय करें, जानकीनाथ सहाय करें॥


रघुवंशी संत सुखदायी, तुलसीदास गुन गाय करें,

चरन कमल में लीन रहकर, भक्त जन सुख पाय करें॥

हरि नाम जप कर जीवन, प्रभु कृपा बरसाय करें,

जानकीनाथ सहाय करें, जानकीनाथ सहाय करें॥


जब जब संकट घेरत भारी, नर कोई बिगाड़ न सके,

राम कृपा से जीवन सुधरै, हर दुख-दर्द दूर भगे॥

भक्त हृदय में विश्वास जगै, प्रभु सदा रक्षा करै,

जानकीनाथ सहाय करें, जानकीनाथ सहाय करें॥

मंगलवार, 8 सितंबर 2026

ओ मेरा श्याम आजा रे मेरे सामने॥





श्याम सवेरे देखूँ तुझको, मन में उठे उजियारा,

तेरी छवि से जीवन मेरा, बन जाए सुखसारा।

हर पल तुझको पुकारूँ मैं, तस्वीर को निहारूँ मैं,

ओ मेरा श्याम आजा रे मेरे सामने॥

ओ मेरा श्याम आजा रे मेरे सामने॥

तेरी मुस्कान से सावरिया, किस्मत जगमग हो जाती,

तेरे चरण पकड़ ले कोई, जीवन धन्य बन जाती।

हर क्षण तुझको पुकारूँ मैं, तस्वीर को निहारूँ मैं,

ओ मेरा श्याम आजा रे मेरे सामने॥

ओ मेरा श्याम आजा रे मेरे सामने॥

गिरने से पहले आकर बाबा, तू ही मुझे संभाले,

तूफ़ानों से पार उतारे, विश्वास यही मतवाले।

तन-मन तुझको अर्पण करूँ, तस्वीर को निहारूँ मैं,

ओ मेरा श्याम आजा रे मेरे सामने॥

ओ मेरा श्याम आजा रे मेरे सामने॥

तेरे आगे सारी दुनिया, फीकी सी लग जाती है,

तेरे प्रेम की गहराई, नजदीकी बन जाती है।

तक़दीर अपनी सँवारूँ मैं, तस्वीर को निहारूँ मैं,

ओ मेरा श्याम आजा रे मेरे सामने॥

ओ मेरा श्याम आजा रे मेरे सामने॥


श्याम कृपा से जीवन मेरा, हर दुख-दर्द मिट जाता,

तेरे नाम का जप करूँ मैं, हर पल सुख मिल जाता।

भक्ति में डूबा रहूँ सदा, तस्वीर को निहारूँ मैं,

ओ मेरा श्याम आजा रे मेरे सामने॥

ओ मेरा श्याम आजा रे मेरे सामने॥

भज मन राम चरण सुखदाई

भज मन राम चरण सुखदाई टेक - भज मन राम चरण सुखदाई, भज मन राम चरण सुखदाई ॥ छंद 1 - जिन चरनन से गंगा प्रगटी, शिव शीश जटा समाई। जटा-शंकरी नाम ते...