शनिवार, 4 अक्टूबर 2025

शिव तांडव स्त्रोत :रावण रचित


जटाटवीगलज्जल प्रवाहपावितस्थले
गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजंगतुंगमालिकाम्‌।
डमड्डमड्डमड्डमनिनादवड्डमर्वयं
चकार चंडतांडवं तनोतु नः शिवः शिवम ॥1॥
                     

जटा कटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिंपनिर्झरी ।
विलोलवी चिवल्लरी विराजमानमूर्धनि ।
धगद्धगद्ध गज्ज्वलल्ललाट पट्टपावके
किशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं ममं ॥2॥

धरा धरेंद्र नंदिनी विलास बंधुवंधुर-
स्फुरदृगंत संतति प्रमोद मानमानसे ।
कृपाकटा क्षधारणी निरुद्धदुर्धरा
पदि
कवचिद्विगम्बरे मनो विनोदमेतु वस्तुनि ॥3॥
                        


जटा भुजं गपिंगल स्फुरत्फणामणिप्रभा-
कदंबकुंकुम द्रवप्रलिप्त दिग्वधूमुखे ।
मदांध सिंधु रस्फुरत्वगुत्तरीयमेदुरे
मनो विनोदद्भुतं बिंभर्तु भूतभर्तरि ॥4॥
                     


सहस्र लोचन प्रभृत्य शेषलेखशेखर-
प्रसून धूलिधोरणी विधूसरांघ्रिपीठभूः ।
भुजंगराज मालया निबद्धजाटजूटकः
श्रिये चिराय जायतां चकोर बंधुशेखरः ॥5॥


ललाट चत्वरज्वलद्धनंजयस्फुरिगभा-
निपीतपंचसायकं निमन्निलिंपनायम्‌ ।
सुधा मयुख लेखया विराजमानशेखरं
महा कपालि संपदे शिरोजयालमस्तू नः ॥6॥
            


कराल भाल पट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वल-
द्धनंजया धरीकृतप्रचंडपंचसायके ।
धराधरेंद्र नंदिनी कुचाग्रचित्रपत्रक-
प्रकल्पनैकशिल्पिनि त्रिलोचने मतिर्मम ॥7॥
  


नवीन मेघ मंडली निरुद्धदुर्धरस्फुर-
त्कुहु निशीथिनीतमः प्रबंधबंधुकंधरः ।
निलिम्पनिर्झरि धरस्तनोतु कृत्ति सिंधुरः
कलानिधानबंधुरः श्रियं जगंद्धुरंधरः ॥8॥
    


प्रफुल्ल नील पंकज प्रपंचकालिमच्छटा-
विडंबि कंठकंध रारुचि प्रबंधकंधरम्‌
स्मरच्छिदं पुरच्छिंद भवच्छिदं मखच्छिदं
गजच्छिदांधकच्छिदं तमंतकच्छिदं भजे ॥9॥
  


अगर्वसर्वमंगला कलाकदम्बमंजरी-
रसप्रवाह माधुरी विजृंभणा मधुव्रतम्‌ ।
स्मरांतकं पुरातकं भावंतकं मखांतकं
गजांतकांधकांतकं तमंतकांतकं भजे ॥10॥


जयत्वदभ्रविभ्रम भ्रमद्भुजंगमस्फुर-
द्धगद्धगद्वि निर्गमत्कराल भाल हव्यवाट्-
धिमिद्धिमिद्धिमि नन्मृदंगतुंगमंगल-
ध्वनिक्रमप्रवर्तित प्रचण्ड ताण्डवः शिवः ॥11॥


दृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजंग मौक्तिकमस्रजो-
र्गरिष्ठरत्नलोष्टयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः ।
तृणारविंदचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः
समं प्रवर्तयन्मनः कदा सदाशिवं भजे ॥12॥


कदा निलिंपनिर्झरी निकुजकोटरे वसन्‌
विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरःस्थमंजलिं वहन्‌।
विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः
शिवेति मंत्रमुच्चरन्‌कदा सुखी भवाम्यहम्‌॥13॥


निलिम्प नाथनागरी कदम्ब मौलमल्लिका-
निगुम्फनिर्भक्षरन्म धूष्णिकामनोहरः ।
तनोतु नो मनोमुदं विनोदिनींमहनिशं
परिश्रय परं पदं तदंगजत्विषां चयः ॥14॥




प्रचण्ड वाडवानल प्रभाशुभप्रचारणी
महाष्टसिद्धिकामिनी जनावहूत जल्पना ।
विमुक्त वाम लोचनो विवाहकालिकध्वनिः
शिवेति मन्त्रभूषगो जगज्जयाय जायताम्‌ ॥15॥



मंगलवार, 24 दिसंबर 2024

आ लौट के आजा हनुमान तुम्हे श्री राम बुलाते है|| Lakshmanke bacha le pran




आ लौट के आजा हनुमान तुम्हे श्री राम बुलाते है

लक्ष्मण के बचा ले तू प्राण
तुम्हे श्री राम बुलाते है
आ लौट के आजा हनुमान
तुम्हे श्री राम बुलाते है
गए पवन सूत लाने संजीवन
अब तक क्यों नही आये
सेनापति सुग्रीव पुकारे
नर बानर घबराये
सब लोग भये सुनसान
तुम्हे श्री राम बुलाते है
आ लौट के आजा हनुमान
तुम्हे श्री राम बुलाते है

कभी तडपते कभी बिलखते
जीभर के प्रभु रोते
आये लखन तुम
अपनी माँ के हो इकलौते बेटे
यु रुदन करत है महान
तुम्हे श्री राम बुलाते है
आ लौट के आजा हनुमान
तुम्हे श्री राम बुलाते है

बीत गयी सब रैन
घडी रही ना एक पल भी बाकि
देख देख के राह तुम्हारी
बैरन अंखिया तांकि
कहि उदय ना हो जाये घात
तुम्हे श्री राम बुलाते है
आ लौट के आजा हनुमान
तुम्हे श्री राम बुलाते है

रात समय हनुमान संजीवन
ले सेना में आये झूमर लाली
धन्य बजरंगी लक्ष्मण प्राण बचाए
तब जाग उठे बलवान
तुम्हे श्री राम बुलाते है
आ लौट के आजा हनुमान
तुम्हे श्री राम बुलाते है

आ लौट के आजा हनुमान
तुम्हे श्री राम बुलाते है
लक्ष्मण के बचा ले तू प्राण
तुम्हे श्री राम बुलाते है
आ लौट के आजा हनुमान
तुम्हे श्री राम बुलाते है

---------------










सोमवार, 23 दिसंबर 2024

भक्ति के रंग में रंगे, हनुमान नज़र आये||फ़िल्मी तर्ज - आये हो मेरी जिंदगी में तुम बहार बनके ||Hanuman Bhajan

 




इस भजन  के मुख्य भावार्थ हैं:

  
भक्ति के रंग में रंगे, हनुमान नज़र आये
चीर दिया सीना... सियाराम नजर आए
भक्ति के रंग में रंगे, हनुमान नज़र आये
रावण के बोल तीखे, हनुमत को नही भाए
चीर दिया सीना... सियाराम नजर आए
भक्ति के रंग में रंगे, हनुमान नज़र आये

सुग्रीव के संग वन में, हनुमान जी मिले थे
यारी के फूल मन मे, यही से ही खिले थे
बने पक्के यार दोनों... दुनिया मे अमर पाए
चीर दिया सीना... सियाराम नजर आए
भक्ति के रंग में रंगे, हनुमान नज़र आये

रावण के वश से सींता,हनुमान छुड़ा लाये
लक्ष्मण को लगी शक्ति.श्री राम जी घबराए
वो पहाड़ उठा लाये भक्त वीर कहलाये
चीर दिया सीना... सियाराम नजर आए
भक्ति के रंग में रंगे, हनुमान नज़र आये

--------











भोले के हाथों में, है भक्तो की डोर || Bhole ke hath me he bhakton ki dor



भोले के हाथों में, है भक्तो की डोर,

किसी को खींचे धीरे, और किसी को खींचे जोर,

भोले के हाथो में, है भक्तो की डोर......


मर्जी है इसकी हमको, जैसे नचाए,
जितनी जरुरत उतना, जोर लगाए,
ये चाहे जितनी खींचे, हम काहे मचाए शोर,
किसी को खींचे धीरे, और किसी को खींचे जोर,
भोले के हाथो में, है भक्तो की डोर.....

भोले तुम्हारे जब से, हम हो गए है,
गम जिंदगानी के, कम हो गए है,
बंधकर तेरी डोरी से, हम नाचे जैसे मोर,
किसी को खींचे धीरे, और किसी को खींचे जोर,
भोले के हाथो में, है भक्तो की डोर.....

खिंच खिंच डोरी जो, संभाला ना होता,
हमको मुसीबत से, निकाला ना होता,
ये चाहे जितना खींचे, हम खींचते इसकी ओर,
किसी को खींचे धीरे, और किसी को खींचे जोर,
भोले के हाथो में, है भक्तो की डोर.....

दास का टूटे कैसे, भक्तो से नाता,
डोर से बंधा है तेरे, प्रेमी का धागा,
तू रख इसपे भरोसा, ये डोर नहीं कमजोर,
किसी को खींचे धीरे, और किसी को खींचे जोर,
भोले के हाथो में, है भक्तो की डोर......
.

 -------------








मेरे साँवरे तेरे बिन जी ना लगे भजन ||फ़िल्मी तर्ज - जिये तो जिये कैसे बिन आपके||Mere sanware tere bin

 

मेरे साँवरे तेरे बिन जी ना लगे भजन 



मेरे साँवरे तेरे बिन जी ना लगे
राह निहारे ये नयन,जी ना लगे

तुम्ही मेरी प्रीत कान्हा,तुम्ही मेरे मीत हो
तुम्ही मेरे दिल की सरगम,तुम्ही मेरे गीत हो
जीवन की सांसें बनी हैं बावरिया
आके सुनाजा इनको बाँसुरिया
मेरे साँवरे तेरे बिन जी ना लगे

रूखा लगे,बिना तेरे अब तो श्याम ये जीवन
हरपल तड़पता है दिल कब होगा ये मिलन
दे दी सज़ा,कैसी मुझे
चांद सितारे भी ,फीके लगे
मेरे साँवरे तेरे बिन जी ना लगे

एक वारि आजाओ तो हृदय में बिठाऊंगी
भावना से तुझको अपनी रूह में बसाउंगी
मेरा ये जीवन है बस तेरा

समर्पित है तुझको सब कुछ मेरा
मेरे साँवरे तेरे बिन जी ना लगे

मेरे साँवरे तेरे बिन जी ना लगे
राह निहारे ये नयन,जी ना लगे

बोल बम बम प्यारे बोल बम बम ||Baba Mahakal sare har lenge gum




बोल बम बम प्यारे बोल बम बम
बम बम बम बम बम बम बम बम,
जिंदगी में कुछ भी रहेगा नही गम,
बोल बम बम प्यारे बोल बम बम ॥
बड़े ही दयालु भोले कष्ट हर लेते है,
धन और माल से खजाना भर देते है,
चाहे बोलो हर हर चाहे बम बम,
बोल बम बम प्यारे बोल बम बम ॥
मेरे महांकाल की तो दुनिया दीवानी है,
भगतो को वर देते बड़े वरदानी है,
बाबा महाकाल सारे हर लेंगे गम,
बोल बम बम प्यारे बोल बम बम ॥
दास गणेश तेरे चरणों का दीवाना है,
भोले तेरे नाम का सहारा मुझे पाना है,
हर पल हर छण जपूँ बम बम,
बोल बम बम प्यारे बोल बम बम ॥


शिव तांडव स्त्रोत :रावण रचित

जटाटवीगलज्जल प्रवाहपावितस्थले गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजंगतुंगमालिकाम्‌। डमड्डमड्डमड्डमनिनादवड्डमर्वयं चकार चंडतांडवं तनोतु नः शिवः शिवम ॥1॥  ...