नजर में बसा लो सांवरे बिहारी
छंद 1 -
जरा पास आओ मेरे बांके बिहारी,
नैनन में भर लूं सूरत तुम्हारी।
विरह में तरसे है अखियां हमारी,
नजर में बसा लो छवि ये तुम्हारी,
जरा पास आओ मेरे बांके बिहारी।।
छंद 2 -
मोर मुकुट प्यारा, अधर पे मुरलिया,
तेरी मुस्कान पे वारी है दुनिया।
तेरी ये बांकपन, ये मतवारी चाल,
दिल मेरा खींचे है नंद के लाला,
जरा पास आओ मेरे बांके बिहारी।।
छंद 3 -
न राधा सी प्रीत है, न मीरा सा त्याग,
फिर भी चरणों में मेरे बड़ा अनुराग।
मैं दासी तुम्हारी, तुम हो गिरधारी,
एक झलक दिखा दो हे कुंज बिहारी,
जरा पास आओ मेरे बांके बिहारी।।
छंद 4 -
यमुना किनारे तेरा रास रचाना,
गोपियन संग मिलके मधुर मुस्काना।
उसी रास में मुझको भी बुला लो,
अपनी चरण रज मस्तक लगा लो,
जरा पास आओ मेरे बांके बिहारी।।
छंद 5 -
बहुत जन्म बीते आस में तुम्हारी,
अब तो दरस दे दो हे कृष्ण मुरारी।
न चाहूं मैं हीरा, न चाहूं मैं मोती,
बस चाहूं चरणों में प्रीत की ज्योति,
नैनन में भर लूं सूरत तुम्हारी,
जरा पास आओ मेरे बांके बिहारी।।

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