रविवार, 20 सितंबर 2026

ये देख तमाशा जग का, सब झूठा मेला रे, तर्ज : दिल दीवाने का**




ये देख तमाशा जग का

भावार्थ पर नया भजन - तर्ज : दिल दीवाने का**


### छंद 1 - स्थायी

ये देख तमाशा जग का, सब झूठा मेला रे,

दो दिन का ये सपना है, फिर होता अकेला रे |

माया की नगरी सारी, बस एक खिलौना है,

हँसता है जग ऊपर से, भीतर सब रोना है ||


### छंद 2

बचपन खेल में खोया, जवानी में जोश आया,

बुढ़ापा आते-आते तो, सब कुछ ही झूठ पाया |

कागज़ की ये नैया है, पानी में बहती है,

साँसों की डोरी टूटी, तो फिर नहीं रहती है ||


### छंद 3

महल-दुमहले देखे, और देखे खजाने रे,

रावण जैसे राजा भी, मिट्टी में समाने रे |

साथ न दौलत जाये, न जाये तेरा बंगला,

खाली हाथ आया जग में, खाली जायेगा पगला ||


### छंद 4

अपने-पराये सारे, मतलब के साथी हैं,

स्वारथ निकलते ही तो, सब भूल ही जाती हैं |

एक सच्चा साथी है, वो मेरा सांवरा है,

गिरते को थामे हरदम, वो ही तो सहारा है ||


### छंद 5 - अंतिम

छोड़ दे अभिमान बंदे, हरि नाम सुमिर ले,

बीत रहा हर लम्हा, क्यों व्यर्थ में तू खोवै रे |

शरण में आ जा प्यारे, श्याम के तू प्यारे,

ये तमाशा छूटेगा, मिलेंगे मोहन द्वारे ||

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ये देख तमाशा जग का, सब झूठा मेला रे, तर्ज : दिल दीवाने का**

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