मंगलवार, 1 सितंबर 2026
गुरुदेव मेरी नैया, उस पार लगा देना,
मुखड़ा -
गुरुदेव मेरी नैया,
उस पार लगा देना,
भव सागर में डोलूं,
आकर संभाल लेना,
गुरुदेव मेरी नैया,
उस पार लगा देना ॥
छंद 1 -
तुम ज्ञान के हो सागर, मैं अज्ञानी दास तुम्हारा,
तुमने ही दिखलाया, है मुक्ति का द्वारा,
भटका हूँ अंधियारे में, उजियारा दिखा देना,
गुरुदेव मेरी नैया, उस पार लगा देना ॥
छंद 2 -
तुम शब्द ब्रह्म स्वरूप, तुम वाणी के सार,
तुम बिना नहीं कोई, मेरा खेवनहार,
मंत्रों से पावन कर, मन मेरा बना देना,
गुरुदेव मेरी नैया, उस पार लगा देना ॥
छंद 3 -
यह मन बड़ा चंचल, माया में भरमाए,
क्षण भर भी तुमसे हटके, चैन न पाय,
बांधो प्रेम की डोरी, अपना बना लेना,
गुरुदेव मेरी नैया, उस पार लगा देना ॥
छंद 4 -
संसार के ये बंधन, अब तोड़ो सतगुरु मेरे,
चरणों में थोड़ी सी, जगह दे दो मेरे,
सेवा में जीवन बीते, ऐसा वर दे देना,
गुरुदेव मेरी नैया, उस पार लगा देना ॥
छंद 5 -
जब अंतिम समय आए, तुम सामने आ जाना,
अपने ही हाथों से, भव बंध छुड़ा जाना,
अब तक तो निभाया जैसे, आगे भी निभा देना,
गुरुदेव मेरी नैया, उस पार लगा देना ॥
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