
नया भजन - "तुम शरणाई आया"
तुम शरणाई आया ठाकुर, तुम शरणाई आया,
मिट गयो मेरे मन का अंधियारा,
जब से अलख जगाया,
तुम शरणाई आया ठाकुर, तुम शरणाई आया।। 1 ।।
बिन बोले सब पीर पछानी,
बिन बोले सब पीर पछानी,
निर्धन को धन धाम लुटाया, ठाकुर,
तुम शरणाई आया,
तुम शरणाई आया ठाकुर, तुम शरणाई आया।। 2 ।।
भ्रम के बंधन सहज ही टूटे,
हृदय कमल विकसाया, ठाकुर,
तुम शरणाई आया,
तुम शरणाई आया ठाकुर, तुम शरणाई आया।। 3 ।।
भवसागर की लहर डुबोवे,
तुम ही पार लगाया, ठाकुर,
तुम शरणाई आया,
तुम शरणाई आया ठाकुर, तुम शरणाई आया।। 4 ।।
कहो आलोक दास अब केहि बिसरूँ,
कहो आलोक दास अब केहि बिसरूँ,
तुमने आपनाय अपनाया, ठाकुर,
तुम शरणाई आया,
तुम शरणाई आया ठाकुर, तुम शरणाई आया।। 5 ।।
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