। हे गुरुदेव प्रणाम आपके चरणों में ।।
सारे वेद पुराण आपके चरणों में,
सारे तीरथ धाम आपके चरणों में,
हे गुरुदेव प्रणाम आपके चरणों में ॥
छंद 1
हाथ जो शिष्य के शीश धरे वो,
भवसागर से पार करे वो,
जिस पर कृपा कटाक्ष हो आपका,
जीवन उसका संवर जाता है,
चारों धाम और चारों वेद,
सिमटे एक प्रणाम आपके चरणों में,
हे गुरुदेव प्रणाम आपके चरणों में ॥
छंद 2
ज्ञान का दीप जलाते हो गुरुवर,
अज्ञान का तम मिटाते हो गुरुवर,
भटके हुओं को राह दिखा कर,
जीवन सफल बनाते हो गुरुवर,
काम क्रोध मद लोभ का बंधन,
छूटे सुबहो शाम आपके चरणों में,
हे गुरुदेव प्रणाम आपके चरणों में ॥
छंद 3
मात पिता ने देह दी हमको,
आपने जीवन दान दिया है,
मोह माया में फंसे थे हम तो,
आपने ब्रह्म का ज्ञान दिया है,
जन्म मरण के सारे बंधन,
टूटें एक ही नाम आपके चरणों में,
हे गुरुदेव प्रणाम आपके चरणों में ॥
छंद 4
शिष्य है बालक आप पिता हो,
आप ही माता आप सखा हो,
डूबती नैया के खेवैया,
आप ही तो भाग्य विधाता हो,
निर्धन को धनवान बना दो,
पापी को निष्काम आपके चरणों में,
हे गुरुदेव प्रणाम आपके चरणों में ॥
छंद 5
वाणी में हो अमृत जैसा,
दर्शन में हो शांति का सागर,
आपकी एक मुस्कान से गुरुवर,
भर जाता है मन का गागर,
इस दास की बस एक ही इच्छा,
जीवन बीते आठों याम आपके चरणों में,
हे गुरुदेव प्रणाम आपके चरणों में ॥
दोहा -
गुरु बिन ज्ञान न उपजे,
गुरु बिन मिले न मोक्ष,
गुरु कृपा जब होत है,
मिटे सकल भव शोक ॥

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