शुक्रवार, 4 सितंबर 2026

भजन - तू प्यार का सागर है



भजन - तू प्यार का सागर है

ध्रुव पद -
तू प्यार का सागर है, तेरी इक बूँद के प्यासे हम,
जो दर से है ठुकराया, जाएँ तो जाएँ कहाँ से हम।
तू प्यार का सागर है...

छंद 1 -
भटका है मन का राही, सूझे न कोई किनारा,
गहरी है मोह की नदिया, डूबा है जग ये सारा।
तू ही बता दे केवट, आए हैं किस जिया से हम,
तू प्यार का सागर है...

छंद 2 -
साँसों की डोर है कच्ची, पल-पल है टूट रही,
आशा की लौ है धुंधली, बुझ-बुझ के छूट रही।
दे दे सहारा ज़रा सा, बिखरे हैं जहाँ-जहाँ से हम,
तू प्यार का सागर है...

छंद 3 -
तेरे ही हाथ में लेखा, तेरे ही हाथ में लेखनी,
तू ही है माफ़ करने वाला, तू ही है सबकी देखनी।
भूले हैं राह जो अपनी, ला दे उसी डगर से हम,
तू प्यार का सागर है...

छंद 4 -
कर्मों की खेती जो बोई, वही यहाँ काटनी है,
तेरी अदालत सबसे न्यारी, सच्ची ही बाटनी है।
कर दे क्षमा अपराधों को, शर्मिंदा हैं खता से हम,
तू प्यार का सागर है...

छंद 5 -
आना है, जाना है सबको, ये खेल चार दिनों का,
क्या लेके आया बंदा, क्या लेके जाए सपनों का।
अंत समय इतना कर दे, हँस के विदा हों यहाँ से हम,
तू प्यार का सागर है...

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