शनिवार, 21 दिसंबर 2024

श्याम चूड़ी बेचने आया || Shyam Chudi Bechne Aaya




श्याम चूड़ी बेचने आया  | Shyam Chudi Bechne Aaya 



हिंदू धर्म में भगवान कृष्ण को प्रेम, करुणा, और ज्ञान के अवतार के रूप में पूजा जाता है। उनके भजन करने से व्यक्ति को कई लाभ होते हैं:

धार्मिक महत्व

1. पापों का नाश: भगवान कृष्ण को पापों का नाश करने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है, इसलिए उनके भजन करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है।
2. मोक्ष की प्राप्ति: भगवान कृष्ण को मोक्ष के देवता के रूप में पूजा जाता है, इसलिए उनके भजन करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
3. सुख और समृद्धि: भगवान कृष्ण को सुख और समृद्धि के देवता के रूप में पूजा जाता है, इसलिए उनके भजन करने से व्यक्ति को सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

आध्यात्मिक महत्व

1. आत्म-शांति: भगवान कृष्ण के भजन करने से व्यक्ति को आत्म-शांति की प्राप्ति होती है।
2. मानसिक शांति: भगवान कृष्ण के भजन करने से व्यक्ति को मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।
3. आध्यात्मिक विकास: भगवान कृष्ण के भजन करने से व्यक्ति का आध्यात्मिक विकास होता है।

सामाजिक महत्व

1. सामाजिक एकता: भगवान कृष्ण के भजन करने से सामाजिक एकता को बढ़ावा मिलता है।
2. सामाजिक सौहार्द: भगवान कृष्ण के भजन करने से सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा मिलता है।
3. सामाजिक समरसता: भगवान कृष्ण के भजन करने से सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिलता है।

इस प्रकार, कृष्ण भजन का महत्व बहुत अधिक है, और यह व्यक्ति के जीवन में कई लाभ प्रदान करता है

मनहारी का भेस बनाया, श्याम चूड़ी बेचने आया।

छलिया का भेस बनाया, श्याम चूड़ी बेचने आया॥

झोली कंधे धरी, उस में चूड़ी भरी।
गलिओं में चोर मचाया, श्याम चूड़ी बेचने आया॥

राधा ने सुनी, ललिता से कही।
मोहन को तरुंत बुलाया, श्याम चूड़ी बेचने आया॥

चूड़ी लाल नहीं पहनू, चूड़ी हरी नहीं पहनू।
मुझे श्याम रंग है भाया, श्याम चूड़ी बेचने आया॥

राधा पहनन लगी श्याम पहनाने लगे।
राधा ने हाथ बढाया, श्याम चूड़ी बेचने आया॥

राधे कहने लगी, तुम हो छलिया बढे।
धीरे से हाथ दबाया, श्याम चूड़ी बेचने आया॥

इस भजन  के मुख्य भावार्थ हैं:

1. भगवान कृष्ण और राधा का प्रेम: इसमें भगवान कृष्ण और राधा के बीच के प्रेम और संवाद का वर्णन किया गया है।
2. भगवान कृष्ण की चतुराई: इसमें भगवान कृष्ण की चतुराई और उनके द्वारा राधा के साथ किये गए संवाद का वर्णन किया गया है।
3. राधा की भक्ति: इसमें राधा की भगवान कृष्ण के प्रति भक्ति और प्रेम का वर्णन किया गया है।
4. प्रेम और हास्य का संवाद: इसमें भगवान कृष्ण और राधा के बीच में प्रेम और हास्य का संवाद का वर्णन किया गया है

समीक्षा-

यह एक भक्ति गीत है जो भगवान कृष्ण और राधा के बीच के प्रेम और संवाद का वर्णन करता है। इसमें भगवान कृष्ण ने मनहारी का भेस बनाया है और राधा के पास चूड़ी बेचने आये हैं।

गीत में आगे कहा गया है कि राधा ने भगवान कृष्ण को पहचान लिया है और उनके साथ प्रेम और हास्य का संवाद किया है। इसमें राधा ने भगवान कृष्ण से कहा है कि वह लाल और हरी चूड़ी नहीं पहनेगी, क्योंकि उसे श्याम रंग पसंद है।

गीत में आगे कहा गया है कि भगवान कृष्ण और राधा के बीच में प्रेम और हास्य का संवाद होता है, जिसमें वे एक दूसरे के साथ खेलते हैं और प्रेम करते हैं।


शुक्रवार, 20 दिसंबर 2024

सारे तीरथ धाम आपके चरणों में ||Sare tirath dham aapke charno me



सारे तीरथ धाम आपके चरणों में गुरु भजन का महत्व बहुत अधिक है!

इस भजन में गुरु को सर्वोच्च आध्यात्मिक गंतव्य के रूप में पूजा जाता है, जो कि सभी तीर्थों और धामों का समावेश करता है। यह भजन गुरु की महिमा और उनके चरणों में समर्पण की भावना को व्यक्त करता है।

इस भजन के मुख्य महत्व हैं:


1. गुरु की महिमा: इस भजन में गुरु को सर्वोच्च आध्यात्मिक गंतव्य के रूप में पूजा जाता है, जो कि उनकी महिमा और महत्व को दर्शाता है।

2. समर्पण और भक्ति: यह भजन समर्पण और भक्ति की भावना को व्यक्त करता है, जो कि गुरु के चरणों में समर्पण को दर्शाता है।

3. आध्यात्मिक विकास: इस भजन में गुरु के चरणों में समर्पण को आध्यात्मिक विकास के लिए आवश्यक बताया गया है।

4. मानसिक शांति और आनंद: यह भजन मानसिक शांति और आनंद की भावना को व्यक्त करता है, जो कि गुरु के चरणों में समर्पण से प्राप्त होता है।

इस प्रकार, सारे तीरथ धाम आपके चरणों में गुरु भजन का महत्व बहुत अधिक है, जो कि गुरु की महिमा और उनके चरणों में समर्पण की भावना को व्यक्त करता है



सारे तीरथ धाम आपके चरणों में 
सारे तीरथ धाम आपके चरणों में,
हे गुरुदेव प्रणाम आपके चरणो में ॥

ह्रदय में माँ गौरी लक्ष्मी,
कंठ शारदा माता है,
जो भी मुख से वचन कहे वो,
वचन सिद्ध हो जाता है,
है गुरु ब्रह्मा है गुरु विष्णु,
है शंकर भगवान आपके चरणो में,
हे गुरुदेव प्रणाम आपके चरणो में ॥

जनम के दाता मात पिता है,
आप करम के दाता है,
आप मिलाते है ईश्वर से,
आप ही भाग्य विधाता हैं,
दुखिया मन को रोगी तन को,
मिलता है आराम आपके चरणो में,
हे गुरुदेव प्रणाम आपके चरणो में ॥

निर्बल को बलवान बना दो,
मूर्ख को गुणवान प्रभु,
‘देवकमल’ और ‘बंसी’ को भी,
ज्ञान का दो वरदान प्रभु,
हे महादानी हे महाज्ञानी,
रहूँ मैं सुबहो श्याम आपके चरणो में,
हे गुरुदेव प्रणाम आपके चरणो में ॥

दोहा – कर्ता करे न कर सके,
पर गुरु करे सब होय,
सात द्वीप नौ खंड में,
गुरु से बड़ा ना कोय ॥

मैं तो सात समुन्द्र की मसि करूं,
लेखनी सब बन राय,
सब धरती कागज़ करूँ,
पर गुरु गुण लिखा ना जाए ॥

सारे तीरथ धाम आपके चरणों में,
हे गुरुदेव प्रणाम आपके चरणो में ॥

भोले नाथ से निराला कोई और नही||Bholenath se nirala koi aur nahin

हिंदू धर्म में भगवान शिव को शंकर भोलेनाथ के रूप में पूजा जाता है, जो जीवन के हर पहलू में शक्ति, सुरक्षा, और मुक्ति के प्रतीक हैं।

शंकर भोलेनाथ के भजन करने से व्यक्ति को कई लाभ होते हैं:

धार्मिक महत्व

1. पापों का नाश: भगवान शिव को पापों का नाश करने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है, इसलिए उनके भजन करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है।
2. मोक्ष की प्राप्ति: भगवान शिव को मोक्ष के देवता के रूप में पूजा जाता है, इसलिए उनके भजन करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
3. सुख और समृद्धि: भगवान शिव को सुख और समृद्धि के देवता के रूप में पूजा जाता है, इसलिए उनके भजन करने से व्यक्ति को सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

आध्यात्मिक महत्व

1. आत्म-शांति: भगवान शिव के भजन करने से व्यक्ति को आत्म-शांति की प्राप्ति होती है।
2. मानसिक शांति: भगवान शिव के भजन करने से व्यक्ति को मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।
3. आध्यात्मिक विकास: भगवान शिव के भजन करने से व्यक्ति का आध्यात्मिक विकास होता है।

सामाजिक महत्व

1. सामाजिक एकता: भगवान शिव के भजन करने से सामाजिक एकता को बढ़ावा मिलता है।
2. सामाजिक सौहार्द: भगवान शिव के भजन करने से सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा मिलता है।
3. सामाजिक समरसता: भगवान शिव के भजन करने से सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिलता है।

इस प्रकार, शंकर भोलेनाथ के भजन का महत्व बहुत अधिक है, और यह व्यक्ति के जीवन में कई लाभ प्रदान करता है



भोले नाथ से निराला गोरी नाथ से निराला कोई और नही

माथे जिनके चंदा सोहे गल सर्पो की माला,
ऐसा सर पल बिठाने वाला कोई और नही,
भोले नाथ से निराला गोरी नाथ से निराला कोई और नही

जिनका डमरू डम डम अगम निगम के भेद खोले,
ऐसा डमरू भ्जाने वाला और नही,
भोले नाथ से निराला गोरी नाथ से निराला कोई और नही

क्या जब जब करवट बदले भाग जाग ते अगले पिछले,
ऐसा मुझको बचाने वाला और नही,
भोले नाथ से निराला गोरी नाथ से निराला कोई और नही

तूने जग का कष्ट मिटाया मुझ्को स्वामी क्यों विश्राया
एसा जग का रखवाला कोई और नही,
भोले नाथ से निराला गोरी नाथ से निराला कोई और नही

मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है || Mera Aapki Kripa Se,



मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है भजन का भावार्थ बहुत ही सुंदर और गहरा है!

इस भजन में भगवान की कृपा और उनके आशीर्वाद को व्यक्त किया गया है, जो कि व्यक्ति के जीवन में सभी कामों को सफल बनाने में मदद करता है। यह भजन भगवान की महिमा और उनकी कृपा को व्यक्त करता है।

इस भजन के मुख्य भावार्थ हैं:

1. भगवान की कृपा: इस भजन में भगवान की कृपा को व्यक्त किया गया है, जो कि व्यक्ति के जीवन में सभी कामों को सफल बनाने में मदद करता है।
2. आशीर्वाद और समर्थन: यह भजन भगवान के आशीर्वाद और समर्थन को व्यक्त करता है, जो कि व्यक्ति के जीवन में सभी चुनौतियों का सामना करने में मदद करता है।
3. आभार और कृतज्ञता: इस भजन में व्यक्ति भगवान के प्रति आभार और कृतज्ञता की भावना को व्यक्त करता है, जो कि भगवान की कृपा और आशीर्वाद के लिए है।
4. विश्वास और समर्पण: यह भजन व्यक्ति के विश्वास और समर्पण को व्यक्त करता है, जो कि भगवान की कृपा और आशीर्वाद पर आधारित है।

इस प्रकार, मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है भजन का भावार्थ बहुत ही सुंदर और गहरा है, जो कि भगवान की कृपा और आशीर्वाद को व्यक्त करता है
मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है  




मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है,
करते हो तुम कन्हैया मेरा नाम हो रहा है||

पतवार के बिना ही मेरी नाव चल रही है,
बिन मांगे हे कन्हैया हर चीज मिल रही है||

अब क्या बताऊ मोहन आराम हो रहा है,
मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है||

मेरी जिंदगी में तुम हो किस बात की कमी है,
मुझे और अब किसी की परवाह भी नही है||

तेरी बदौलतो से सब काम हो रहा है,
मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है||

दुनिया में होंगे लाखो तेरे जैसा कौन होंगा,
तुज जैसा बंदा परवर भला ऐसा कौन होगा||

अरे थामा है तेरा दामन आराम हो रहा है,
मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है||

मेरा श्याम आजाता मेरे सामने || Mera Shyam Aa Jata




मेरा श्याम आजाता मेरे सामने लिरिक्स | Mera Shyam Aa Jata Lyrics



हिंदू धर्म में भगवान कृष्ण को प्रेम, करुणा, और ज्ञान के अवतार के रूप में पूजा जाता है। उनके भजन करने से व्यक्ति को कई लाभ होते हैं:

धार्मिक महत्व

1. पापों का नाश: भगवान कृष्ण को पापों का नाश करने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है, इसलिए उनके भजन करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है।
2. मोक्ष की प्राप्ति: भगवान कृष्ण को मोक्ष के देवता के रूप में पूजा जाता है, इसलिए उनके भजन करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
3. सुख और समृद्धि: भगवान कृष्ण को सुख और समृद्धि के देवता के रूप में पूजा जाता है, इसलिए उनके भजन करने से व्यक्ति को सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

आध्यात्मिक महत्व

1. आत्म-शांति: भगवान कृष्ण के भजन करने से व्यक्ति को आत्म-शांति की प्राप्ति होती है।
2. मानसिक शांति: भगवान कृष्ण के भजन करने से व्यक्ति को मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।
3. आध्यात्मिक विकास: भगवान कृष्ण के भजन करने से व्यक्ति का आध्यात्मिक विकास होता है।

सामाजिक महत्व

1. सामाजिक एकता: भगवान कृष्ण के भजन करने से सामाजिक एकता को बढ़ावा मिलता है।
2. सामाजिक सौहार्द: भगवान कृष्ण के भजन करने से सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा मिलता है।
3. सामाजिक समरसता: भगवान कृष्ण के भजन करने से सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिलता है।

इस प्रकार, कृष्ण भजन का महत्व बहुत अधिक है, और यह व्यक्ति के जीवन में कई लाभ प्रदान करता है

श्याम सवेरे देखु तुझको कितना सुंदर रूप है,
तेरा साथ ठंडी छाया बाकी दुनिया धूप है,
जब जब भी इसे पुकारू मै, तस्वीर को इसकी निहारू मै ,
ओ मेरा श्याम आजाता मेरे सामने,
ओ मेरा श्याम आजाता मेरे सामने||

खुश हो जाएगर सावरिया किस्मत को चमका देता,
हांथ पकडले अगर किसी का जीवन धन्यबना देता,
यह बातें सोच विचारू मै, तस्वीर को इसकी निहारू मै,
ओ मेरा श्याम आजाता मेरे सामने,
ओ मेरा श्याम आजाता मेरे सामने||

गिरने से पहले ही आकर बाबा मुझे संभालेगा,
पूरा है विश्वास है कभी तू तूफ़ानो से निकालेगा,
ये तनमन तुझपे वारु मै, तस्वीर को इसकी निहारू मै,
ओ मेरा श्याम आजाता मेरे सामने,
ओ मेरा श्याम आजाता मेरे सामने||

श्याम के आगे मुझको तो ये दुनिया फिकी लगती है,
जिस मोह में और जान है वो इतनी नजदीकी लगती है,
अपनी तक़दीर सवांरु मै, तस्वीर को इसकी निहारू मै,
ओ मेरा श्याम आजाता मेरे सामने,
ओ मेरा श्याम आजाता मेरे सामने||

ये देख तमाशा जग का,Ye tamasha jag ka ||तर्ज – दिल दीवाने का

मेरा दिल करता है श्याम को, मैं घर पे ले आऊं भजन का भावार्थ बहुत ही सुंदर और गहरा है!

इस भजन में भगवान श्याम (कृष्ण) के प्रति प्रेम और आकर्षण की भावना को व्यक्त किया गया है। यह भजन भगवान श्याम की महिमा और उनके प्रेम को व्यक्त करता है।

इस भजन के मुख्य भावार्थ हैं:

1. प्रेम और आकर्षण: इस भजन में भगवान श्याम के प्रति प्रेम और आकर्षण की भावना को व्यक्त किया गया है।
2. आध्यात्मिक प्रेम: यह भजन आध्यात्मिक प्रेम की भावना को व्यक्त करता है, जो कि भगवान श्याम के प्रति समर्पण और भक्ति को दर्शाता है।
3. भगवान की महिमा: इस भजन में भगवान श्याम की महिमा और उनके प्रेम को व्यक्त किया गया है।
4. आत्म-समर्पण: यह भजन आत्म-समर्पण की भावना को व्यक्त करता है, जो कि भगवान श्याम के चरणों में समर्पण को दर्शाता है।

इस प्रकार, मेरा दिल करता है श्याम को, मैं घर पे ले आऊं भजन का भावार्थ बहुत ही सुंदर और गहरा है, जो कि भगवान श्याम के प्रति प्रेम और आकर्षण की भावना को व्यक्त करता है




ये देख तमाशा जग का,
भीतर से दुख पाऊं,
मेरा दिल करता है श्याम को,
मैं घर पे ले आऊं,
मेरा दिल करता है श्याम को,
मैं घर पे ले आऊं ॥

तुझे अपने पास बिठाके,
रख लूं मैं तुम्हे छिपा के,
मतलब से भरी निगाहें,
ना देखे नजर उठाके,
बस तू हो मैं हूं बाबा,
मैं भजन तेरे गाऊं,
मेरा दिल करता है श्याम को,
मैं घर पे ले आऊं ॥


जो चमत्कार को तेरे,
ये नमस्कार करते है,
व्यापार करे वो बाबा,
नहीं तुमसे प्यार करते है,
में सेवा करूंगा तेरी,
तुमसे ना कुछ चाहूँ,
मेरा दिल करता है श्याम को,
मैं घर पे ले आऊं ॥


तू देना छोड़ दे बाबा,
ना भेज तू खर्चा घर का,
आते है लोट कर कितने,
फिर देख नजारा दर का,
हो जाओ ‘सचिन’ के बाबा,
कुछ ऐसा कर जाऊं,
मेरा दिल करता है श्याम को,
मैं घर पे ले आऊं ॥


ये देख तमाशा जग का,
भीतर से दुख पाऊं,
मेरा दिल करता है श्याम को,
मैं घर पे ले आऊं,
मेरा दिल करता है श्याम को,
मैं घर पे ले आऊं ॥

आ लौट के आजा हनुमान तुम्हे श्री राम बुलाते है|| Lakshmanke bacha le pran

इस गीत के मुख्य भावार्थ हैं: 1. भगवान हनुमान की महिमा: इसमें भगवान हनुमान की महिमा और उनकी भक्ति का वर्णन किया गया है। 2. भगवान हनुमान की भक...