
हे पवनसुत लौट के आओ, मेरे राम बुलाते हैं
मूर्छित पड़े हैं लखन लाल, प्रभु तुम्हें बुलाते हैं
आ जाओ, आ जाओ वीर हनुमान, मेरे राम बुलाते हैं
आ जाओ, आ जाओ वीर हनुमान, मेरे राम बुलाते हैं
एकटक निहारें उस राह को, जिस पर तुम चल के जाओगे
सूनी पड़ी है सारी सेना, सब तुम्हें बुलाते हैं
आ जाओ, आ जाओ वीर हनुमान, मेरे राम बुलाते हैं
सुग्रीव व्याकुल, जामवंत अधीर, सबकी साँसें थमती हैं
भालू वानर हाथ जोड़कर, बस तुम्हारी बाट तकते हैं
बीती जाए अंधियारी रैना, भोर होने को आती है
आ जाओ, आ जाओ वीर हनुमान, मेरे राम बुलाते हैं
कभी हृदय से लगा के भाई को, प्रभु नीर बहाते हैं
कभी गगन की ओर देखकर, पवन को समझाते हैं
जाओ पवन तुम वेग दिखाओ, मेरे हनुमत आते हैं
आ जाओ, आ जाओ वीर हनुमान, मेरे राम बुलाते हैं
कभी गगन की ओर देखकर, पवन को समझाते हैं
जाओ पवन तुम वेग दिखाओ, मेरे हनुमत आते हैं
आ जाओ, आ जाओ वीर हनुमान, मेरे राम बुलाते हैं
भालू वानर हाथ जोड़कर, बस तुम्हारी बाट तकते हैं
बीती जाए अंधियारी रैना, भोर होने को आती है
आ जाओ, आ जाओ वीर हनुमान, मेरे राम बुलाते हैं
भरोसा है तुम खाली हाथों, कभी नहीं लौटोगे
संजीवन संग विजय की आशा, अंजनीसुत लाओगे
तुम आओगे तो लखन उठेंगे, ये सब विश्वास जताते हैं
आ जाओ, आ जाओ वीर हनुमान, मेरे राम बुलाते हैं
संजीवन संग विजय की आशा, अंजनीसुत लाओगे
तुम आओगे तो लखन उठेंगे, ये सब विश्वास जताते हैं
आ जाओ, आ जाओ वीर हनुमान, मेरे राम बुलाते हैं

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